आप दुखी क्यों हैं?


आप दुखी क्यों हैं?

वैसे तो सभी अल्पज्ञानी लोग यही उपदेश देते हैं कि मनुष्य के जीवन में सुख-दुःख आना स्वभाविक है। दुःख के बाद सुख और सुख के बाद दुःख आना तय है। लेकिन शिवयोग इन बातों को नहीं मानता। व्यक्ति अपने जीवन में सुख-दुःख का निर्माण स्वयं करता है। इसलिए वह जो चाहता है, उसकी संकल्पना करता है जो उसके जीवन में आता है। दुःख का मुख्य कारण हमारे अंदर व्याप्त अहंकार होता है। क्योंकि जो व्यक्ति अहंकार पर विजय प्राप्त कर लेता है उसके जीवन में कभी भी दुःख नहीं होता। क्योंकि अहंकार कीचड़ के समान होता है, इसमें जो फंस गया वह कभी भी फिर निकल नहीं सकता। इस लिए मनुष्य को अहंकार से बचने की बात हमारे सिद्धों ने कही है। अहंकार से बचने के लिए ही साधना का मार्ग बताया गया है। जिनको नियमित रूप से अपने जीवन में अपनाकर अपने इस जन्म को ही नहीं बल्कि उस जन्म को भी सुधार सकते हैं।

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