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परमात्मा की अनुभूति कैसे करें?

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  परमात्मा की अनुभूति कैसे करें?  संसार में शायद ही कोई ऐसा प्राणी होगा जो परमात्मा की अनुभूति नहीं करना चाहता हो, अन्यथा हर प्राणी इस अनुभूति का अवसर प्राप्त करना चाहता है। लेकिन सही मार्गदर्शन या सही गुरु का सानिध्य प्राप्त न होने के कारण इस अवसर का अनुभव करने से वंचित ही रह जाता है। शिवयोग कहता है कि मनुष्य अपने आध्यात्मिक विचारों और कर्मों के सहारे ही उस परमपिता परमेश्वर की अनुभूति कर सकता है, जो सत-चित-आनंद है। इस अनुभूति को पाने में अध्यात्म वह मार्ग है जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने चंचल मन को स्थिर कर परमात्मा पर केंद्रित करता है और आध्यात्मिक उन्नति को प्राप्त कर आत्मा का परमात्मा में विलय कराने में सफलता प्राप्त कर पाता है। #shivyogwisdom #awareness #spirituality #consciousness #mindfulness

परमशांति को कैसे प्राप्त करें?

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परमशांति को कैसे प्राप्त करें? हम जीवन में भौतिक संसाधनों को प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास करते रहते हैं। एक वस्तु की प्राप्ति के बाद हमारा मन स्वतः ही दूसरी वस्तु को प्राप्त करने के लिए उसके पीछे भागने लगता है। यही उसके जीवन में दुःख और पीड़ा का मुख्य कारण बन जाता है और वह जीवन में परमशांति की अनुभूति नहीं कर पाता है। सांसारिक वस्तुओं के भोग की इच्छा मुनष्य के जीवन को असंतोष से भर देती है। यह असंतोष अन्य अनेक विकारों को जन्म देता है जैसे कि क्रोध, ईर्षा, राग, द्वेष, अनस्तेय इत्यादि। इन विकारों का पूर्ण त्याग करने के बाद ही मनुष्य परमशांति को प्राप्त कर सकता है और इनसे मुक्त होने का इकलौता मार्ग है अध्यात्म। अध्यात्म को जीवन में अपनाकर ही व्यक्ति अपने मन में सकारात्मक भावों को उत्पन्न कर सकता है और अपने जीवन में परमशांति को प्राप्त कर पाता है। #shivyogwisdom #peaceofmind #deepmeditation #awareness #positivethinking

मन की शांति के लिए क्या करें?

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  मन की शांति के लिए क्या करें? जिस व्यक्ति का मन शांत नहीं होगा, वह जीवन में कभी भी अपने लक्ष्य की प्राप्ति नहीं कर सकता। किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उसे मन पर नियंत्रण रखना बहुत जरूरी है। व्यक्ति का मन सबसे ज्यादा चलायमान अवस्था में होता है। जो इस पर नियंत्रण करने की कला को सीख जाते हैं, वही सिद्धत्व की प्राप्ति करते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि कोई कैसे अपने मन पर नियंत्रण प्राप्त कर सकता है, यह तो बहुत ही कठिन कार्य है, तो यह बात सत्य है कि आप भी अपने मन को नियंत्रित कर सकते हैं। तो आपको ज्ञात होना चाहिए कि शिवयोग की साधनाओं को आप अपने दैनिक जीवन में अपनाकर मन पर काबू करने की कला सीख सकते हैं। अध्यात्म ही इकलौता वह मार्ग है जो आपको सत-चित-आनंद का अनुभव करा सकता है। जिसके माध्यम से हमारे सिद्धों ने अपने आपको जानकर जीवन को सफल बनाया है। #shivyogwisdom #awareness #peaceofmind #positivethinking #meditation

आपको आशावान क्यों होना चाहिए?

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 आपको आशावान क्यों होना चाहिए? क्या कभी आपने सोचा है कि आपके जीवन में निराशा क्यों आती है? और इससे निजात पाने के लिए हम क्या कर सकते हैं? अगर नहीं सोचा तो आज हम बताएंगे कि इस समस्या से आप कैसे मुक्त हो सकते हैं। जब आप जीवन के किसी पड़ाव में अज्ञानतावश गलत कदम उठा लेते हैं तो स्वभाविक ही आपको निराशा का सामना करना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में प्रतिकूल परिणाम मिलने से निराश होने के बजाय, आपको अपने उठाए गए गलत कदम को स्वीकार करते हुए उस गलती को सुधारने के बारे में विचार करना चाहिए। जब तक आप अपने द्वारा किए गए पूर्व कर्म का सुधार नहीं करेंगे तब तक आपको मानसिक शांति प्राप्त नहीं होगी। इसके अलावा उन बुरे कर्मों फल स्वरूप आपको वर्तमान में कष्ट-पीड़ा का भोग करना पड़ेगा। इस कष्टकारक प्रारब्ध से छुटकारा पाने के लिए ही आप के लिए शिवयोग की ध्यान-साधनाएं शिवयोग सिद्ध गुरुओं ने बताई हैं। इन साधनाओं के प्रभाव से आप अपने हताशा भरे जीवन में खुशियां, संपन्नता, समृद्धि और आशाएँ ला सकते हैं क्योंकि हम अपने पाप कर्मों को नष्ट कर सुंदर भविष्य का सृजन कर पाते हैं। अध्यात्म के मार्ग पर चलकर, नकारात्मक ऊर्जा को सकारा...

क्या ईश्वर दंड देते है?

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  क्या ईश्वर दंड देते है?  न जाने किसने यह हमारे मन में डाल दिया गया है कि ईश्वर हमारे द्वारा किए गए अच्छे-बुरे कामों को लेखाजोखा लिखता है। इसके बाद जब मृत्यु होती है तब वह हमारे अपराधों की सजा देता है। जबकि वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं होता है, क्योंकि आत्मा तो अजर और अमर है। इसे न अस्त्र काट सकता है, न अग्नि जला सकती है, न पानी भिगा सकता है तो दंड मिलने की बात कैसे सत्य हो सकती है। हां, हम जो भी कर्म करते हैं वही हमें सजा देते हैं। अगर हमारे अच्छे कर्म है तो हमारा जीवन सुखद होगा वहीं अगर हमारे द्वारा किए गए बुरे कर्म ही ज्यादा है तो हमें जीवन में कष्ट, रोगों, पीड़ा का भोग करना पड़ता है। प्रकृति का बहुत सीधा नियम है यदि आप बुरे कर्म बांधे हैं तो दंड भोगना ही पडे़गा और यदि अच्छे कर्म बांधे है तो हमें जीवन में सुख का अनुभव प्राप्त होता है। #shivyogwisdom #awareness #consciousness #divinity #karmicconnection #release

साधना का उद्देश्य जानना जरूरी क्यों?

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  साधना का उद्देश्य जानना जरूरी क्यों? बाबाजी कहते हैं कि साधना करो तो मन में उसका एक ध्येय रखो, बिना ध्येय के साधना व्यर्थ है। शिवयोग में साधक अपने जीवन की किसी समस्या का समाधान पाने आता है, और अपने जीवन में सुखद रुपान्तरण अनुभव करने लगता है। आध्यात्मिकता जीवन जीने का सही तरीका सिखाती है, साथ ही एक साधक के निगेटिव सोच और कर्मों से उसे मुक्त करती है। शिवयोगियों को बाबाजी हमेशा 200 प्रतिशत जीवन जीना सिखाते हैं। इस संसार में रहकर जो भी कार्य जीविका के लिए करते हो, उसे 100% करो, और अपने अंतर्मन को 100% आध्यात्म से जोड़े रखो। आध्यात्म में भी आपको उच्चतम ध्येय रखना चाहिए। #shviyogwisdom #sadhna #awareness #spirituality #divineconnection

आध्यात्मिकता क्यों जरूरी है?

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  आध्यात्मिकता क्यों जरूरी है? इस संसार में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति अच्छा से अच्छा जीवन जीने की संकल्पना करता है। जिसके लिए वह कर्म करता है और भौतिक संसाधनों को एकत्र करने में प्रयासरत रहता है। क्योंकि व्यक्ति इस संसार में आने के बाद भौतिकता को ही वास्तविकता मान बैठता है। वह भौतिक संसाधनों के उपयोग को ही आनंद समझने लगता है। जबकि वास्तव में यह सब उसकी अज्ञानता का प्रमाण देते हैं। क्योंकि व्यक्ति को जब आध्यात्मिक उन्नति होती है और उसे आत्मज्ञान की अनुभूति प्राप्ति होती है, तब उसे पता चलता है कि माया के जाल में फंसकर जिसे वह वास्तविकता मान रहा था, वह सब मिथ्या है। सत्य तो ये है कि जिसने इस संसार को बनाया है, उसी के अंश हम सभी हैं। जिसका इस संसार में जन्म लेने का एक उद्देश्य था, जिसको वह भूल चुका था। इसी कारण से वह इस संसार में बार-बार जन्म-मरण के बंधन में बंधकर रह गया है। आध्यात्मिक जीवन ही व्यक्ति को सत-चित-आनंद की अनुभूति करा सकता है। #shivyogwisdom  #spirituality  #awareness  #mindfulness  #peaceofmind  #thoughts