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परमात्मा को पाने का सबसे सरल उपाय क्या है?

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  परमात्मा को पाने का सबसे सरल उपाय क्या है? हर मनुष्य ईश्वर को प्राप्त करना चाहता है, कोई ही ऐसा व्यक्ति होगा जो परमात्मा को प्राप्त न करना चाहता हो। परमात्मा को प्राप्त करने के लिए जो सबसे अहम चीज है, वह शुद्धि है। क्योंकि जब तक हम शुद्ध नहीं होंगे तब तक ईश्वर की प्राप्ति नहीं हो सकती। यह शुद्धि कई प्रकार से होती है, केवल स्नान कर लेने से ही हम शुद्ध नहीं होते। शुद्ध होने के लिए हमको शरीर के बाहरी और भीतरी रूप से भी शुद्ध होना बहुत अनिवार्य है। क्योंकि जब तक हमारा मन शुद्ध नहीं होता है, तब तक हम वास्तविक रूप से अशुद्ध ही माने जाएंगे। इस लिए मन को शुद्ध करने के लिए सबसे पहले हमें मन में व्याप्त नकारात्मक विचारों को दूर करना होगा और उसकी जगह सकारात्मक विचारों का प्रवाह करना होगा। तभी हम वास्तविक रूप से शुद्ध हो पाएंगे, जब आप शुद्ध हो जाएंगे तो आपको स्वतः ही सूक्ष्म अनुभूतियों का अनुभव होने लगेगा। जिसके बाद हम परमात्मा को प्राप्त कर सकते हैं। #shivyogwisdom #spirituality #DivinityWithin #awareness #puritymatters

क्या जीवन में वैराग्य जरूरी है?

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  क्या जीवन में वैराग्य जरूरी है? अध्यात्म और वैराग्य दोनों ही एक दूसरे से भिन्न हैं। अध्यात्म का तात्पर्य ईश्वर को पाने के लिए साधना करने से है। जबकि वैराग्य का तात्पर्य सांसारिक मोह-माया के त्याग से है। वैराग्य धारण करने वाले व्यक्ति की धारणा होती है कि यदि वह संसार का त्याग कर देते हैं, तो ईश्वर की प्राप्ति हो जाएगी। लेकिन यह संभव नहीं है। जबकि अध्यात्म के लिए हमें अपने विकारों को त्यागने की जरूरत है, संसार को त्यागने की नहीं। तमाम ऐसे लोग संसार में होते हैं जो स्वयं को बैरागी बताते हैं। ऐसे लोग अक्सर संसार को त्यागने की बातें करते रहते हैं और संसार में दोष निकालते रहते हैं। उनको हर समय यह चिंता सताती रहती है कि कहीं सांसारिक वस्तुएं उन्हें आकर्षित न कर लें। इसलिए वे उनसे भागते रहते हैं। यदि आप किसी वस्तु के नियंत्रण में नहीं हैं, आपने संसार की सुख-सुविधा को त्याग दिया है और आप विकारों का त्याग कर चुके हैं, तो वह वस्तु आप को कैसे अपनी ओर आकर्षित कर सकती है? जो मनुष्य इस संसार से भागकर साधना करने का प्रयास करता है, वह बेहद कमजोर साधक होता है। जो संसार में रहकर ही साधना करते हैं उ...

भाषा नहीं भाव समझते हैं भगवान

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  भाषा नहीं भाव समझते हैं भगवान मनुष्य की हर उम्मीद ईश्वर पर टिकी हुई होती है। कुछ अच्छा करने की जब हम सोचते हैं तब हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि कार्य सफल हो जाए। यहां तक कि जब हम किसी मुसीबत में पड़ जाते हैं, तब भी हम उसी ईश्वर से विनती करते हैं कि वह हमें इस मुसीबत से निजात दिलाएं। कभी तो हमारी कोई प्रार्थना ईश्वर तुरंत स्वीकार कर लेते हैं और कभी-कभी हम जैसा चाहते हैं वैसे नहीं होता है। ऐसी स्थिति में सवाल यह उठता है कि हम अपनी बात ईश्वर से कैसे कहें कि वह पूरी हो जाए। शिवयोग में बताया गया है कि भगवान भाषा को नहीं समझते। वह तो साधक के भाव को समझते हैं। हमारे मन में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार के भाव होते हैं। हम जैसा भाव दूसरों के लिए रखेंगे, वैसा ही प्रतिफल हमें जीवन में प्राप्त होता है। इसलिए मनुष्य को अपने मन में सदैव सबके प्रति सकारात्मक भाव रखना चाहिए। ताकि तुम जो प्राप्त करना चाहते हो वह  सरलतम रूप में तुमको प्राप्त हो सके। #lifemanagement #shivyogwisdom #awareness #spirituality #godlanguage

अध्यात्म का अहंकार से क्या संबंध है?

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  अध्यात्म का अहंकार से क्या संबंध है? जिस प्रकार सिक्के के दो पहलू होते हैं, उस ही प्रकार से आध्यात्मिक मनुष्य के भी दो पहलुओं का जिक्र शिवयोग में किया गया है। पहला उजाला और दूसरा अंधेरा। उजाला पक्ष मनुष्य के गुणों को बतलाता है तो अंधेरा पक्ष उसके दोषों को प्रकट करता है। अध्यात्म का उजाला पक्ष सकारात्मक चिंतन को बताया गया है। इसका प्रारम्भ स्वयं के शरीर से होता है। शरीर को अष्टांग योग के नियमों में बांधना पड़ता है। मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार को प्रशिक्षित करना पड़ता है, तब आत्मा के साम्राज्य में प्रवेश होता है। आत्म-साक्षात्कार करके मनुष्य पूर्णता को प्राप्त होता है। अध्यात्म के अंधेरे पक्ष में व्यक्ति एकांत पसंद हो जाता है। उसे एक अजीब सा नशा हो जाता है। कई बार शक्तियां पाकर उस मनुष्य को अहंकार होने लगता है। शक्तियों के मद में कई बार दिखावा करने लगता है। उसे यदि उचित गुरु का संरक्षण मिले तो वह भवसागर से पार हो जाता है। गुरु समर्थ न हो तो डूब जाता है। इसलिए अंधेरे से बचते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए। #shivyogwisdom #spritiuality #selfrealization #awareness ...

We are an amalgamation of our experiences, choices, beliefs and mindset.

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  We are an amalgamation of our experiences, choices, beliefs and mindset. According to these, we live our lives, achieve, succeed, fail and experience. Our daily routine is also an off-shoot of the kind of person we are and what we want from our lives. Sadly, most of us do not know what we want from our lives and the direction in which to steer our lives. We have immense power to create what we want, write our own destiny, manifest the future we want and achieve everything that we set our hearts on, provided we seek it with pure intention. We must live a balanced life, with all parameters checked – personal, professional, social and spiritual. We must work hard, practice full honesty and integrity, be content with what we have and do the best we can. Let go of beliefs and thoughts that pull you down. Avoid trying to be perfect all the time. Stop living to please people. Be more in control of your life. To live a complete life, some discipline, structures and boundaries are mandato...

बुद्धि और गुण में क्या फर्क है?

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  बुद्धि और गुण में क्या फर्क है? बुद्धि जन्म से मिलती है और यह विकसित नहीं की जा सकती है। गुण देख सुन कर पैदा किये जाते हैं, जैसे खाना बनाना ही लें तो घर में खाना बनता देखकर इंसान सीख जाता है। यदि उस कार्य, वस्तु इत्यादि में रूचि भी है तो वह उसका विशेषज्ञ हो जाता है। सड़क पर चलने से काफी कुछ यातायात नियम इंसान सीख जाता है, लेकिन जो बुद्धि से कमजोर है वह सड़क पर भी दूसरों को चलते देखकर भी ठीक से नहीं चल पाता है। बुद्धिमान व्यक्ति गुणहीन हो सकता है यदि वह गुण को महत्व नहीं देता है या सीखना नहीं चाहता है अथवा पालन नहीं करना चाहता है। इसके विपरीत बुद्धिहीन व्यक्ति गुणवान हो सकता है क्योंकि उसको जो सिखाया जाता है वह उसे ट्रेनिंग की तरह स्वीकार कर लेता है। बहुत से बुद्धि से कमजोर लोग तार वाली कुर्सी बुन लेते हैं या वाद्य यंत्र आदि बहुत अच्छी तरह से बजा लेते हैं, क्योंकि जितना भी उनको सिखाया गया है, उसने सीख लिया है। कई बार बुद्धिमान लोग अपनी बुद्धि के कारण सामान्य गुणों में पीछे रह जाते हैं। #shivyogwisdom #lifemanagement #divinity #intelligenceandvirtue #awareness

प्रकृति से एकाकार के लिए करें ये पूजा

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  प्रकृति से एकाकार के लिए करें ये पूजा गोवर्धन पूजा का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। इस त्यौहार को अन्नकूट पूजा के नाम से भी जाना जाता है। यह त्यौहार कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष के पहले दिन यानी प्रतिपदा को मनाया जाता है। आमतौर पर यह दिवाली के पर्व के अगले दिन ही मनाया जाता है। इस त्यौहार को मनाने के पीछे का कारण भगवान श्री कृष्ण से जुड़ा हुआ है। एक पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान इंद्र ने ब्रज गांव में बहुत तेज बारिश शुरू कर दी थी। इस कारण से वहां पर बाढ़ आ गई और त्राहि-त्राहि मच गई। इसके बाद भगवान श्री कृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया था। कई दिनों के लगातार तूफान के बाद लोगों को अप्रभावित देखकर भगवान इंद्र ने अपनी हार मान ली और बारिश को रोक दिया। इसलिए इस दिन को एक त्योहार के रूप में मनाया जाता है और इस पूजा का अलग महत्व है। भगवान श्री कृष्ण ने भगवान इंद्र के घमंड को चूर कर दिया था। इसके बाद सभी ब्रजवासियों ने उस दिन से श्री कृष्ण की पूजा करना शुरू कर दी थी। उसी दिन से ही गोवर्धन पूजा की शुरूआत बताई जाती है।  गोवर्धन ...