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क्या इसी जन्म में आत्म-साक्षात्कार संभव है?

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  क्या इसी जन्म में आत्म-साक्षात्कार संभव है? क्या कभी हम यह सोचते हैं कि हमको जो यह जीवन मिला है, हम इसी जन्म में आत्म-साक्षात्कार को प्राप्त कर लें? समाज में नकारात्मकता फैलाने वाले लोगों को अक्सर यह कहते सुना होगा कि आत्म-साक्षात्कार की स्थिति को प्राप्त करने के लिए कई जन्म लगते हैं। इस बात का कोई तर्क नहीं है। क्योंकि हमारे सामने बुद्ध और विवेकानंद जैसे तमाम उदाहरण हैं जिन्होंने इसी जन्म में आत्म-साक्षात्कार को प्राप्त कर सिद्धत्व की प्राप्ति की है। अब सवाल यह उठता है कि जब ये लोग इस जन्म में आत्म-साक्षात्कार को प्राप्त कर सकते हैं, तो हम क्यों नहीं।  क्या कभी हमने यह उद्देश्य बनाया कि मुझे आत्म-साक्षात्कार प्राप्त हो जाए? मेरे अंदर जो अनंत की सोई हुए शक्तियां हैं वह जागृत हो जाएं? यदि अभी तक नहीं सोचा तो अब उद्देश्य बनाओ कि हमें इसी जीवन में आत्म-साक्षात्कार की स्थिति को प्राप्त करना है। क्योंकि आत्म-साक्षात्कार होते ही तुम चमत्कारी हो जाओगे। मूल प्रकृति तुम्हारी आज्ञा का उल्लंघन नहीं कर सकती। जैसे ही कोई दुःखी तुम्हारे सानिध्य में आएगा उसके सारे कष्ट-दुःख नष्ट हो जाएंगे।...

𝐍𝐨𝐮𝐫𝐢𝐬𝐡 𝐚𝐧𝐝 𝐫𝐞𝐣𝐮𝐯𝐞𝐧𝐚𝐭𝐞 𝐲𝐨𝐮𝐫 𝐛𝐨𝐝𝐲 𝐭𝐨 𝐥𝐞𝐚𝐝 𝐚𝐧 𝐚𝐜𝐭𝐢𝐯𝐞 𝐚𝐧𝐝 𝐟𝐢𝐭 𝐋𝐢𝐟𝐞

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  𝐍𝐨𝐮𝐫𝐢𝐬𝐡 𝐚𝐧𝐝 𝐫𝐞𝐣𝐮𝐯𝐞𝐧𝐚𝐭𝐞 𝐲𝐨𝐮𝐫 𝐛𝐨𝐝𝐲 𝐭𝐨 𝐥𝐞𝐚𝐝 𝐚𝐧 𝐚𝐜𝐭𝐢𝐯𝐞 𝐚𝐧𝐝 𝐟𝐢𝐭 𝐋𝐢𝐟𝐞 To nourish means to provide the energy that is necessary to sustain life, growth, good health and well-being. Food is a form of energy. Nourishment the body is an integral part of maintaining overall health and well-being. A top to bottom approach to nourishing your body requires some changes in your routine and lifestyle. The benefits are a healthy, fit, active and agile body, an alert and sharp mind, ability to live life fully, work more productively and enhance happiness. 𝐃𝐞𝐯𝐞𝐥𝐨𝐩 𝐇𝐞𝐚𝐥𝐭𝐡𝐲 𝐃𝐢𝐞𝐭𝐚𝐫𝐲 𝐇𝐚𝐛𝐢𝐭𝐬: The body requires energy in the form of food to perform all physical functions and nutrify the body. Make your diet healthy with generous helpings of fruits, vegetables and water. If you struggle with fruits and vegetables, then get creative and add them to your diet in the form of juices, salads, soups, yogurts and smoothies. If time is...

दिव्यता की अनुभूति के लिए क्या करें?

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दिव्यता की अनुभूति के लिए क्या करें? प्रत्येक मनुष्य और प्रकृति के सभी जीवों में परमात्मा का वास होता है। इसीलिए सिद्धों ने सभी प्राणियों को एक सामान बताया है, न कोई छोटा है न कोई बड़ा। हम सांसारिकता-भौतिकता के भंवर जाल में इस तरह फंस चुके हैं कि आज हम भूल ही गए हैं कि हमारे अंतर में भी एक दिव्य ज्योति प्रज्ज्वलित है, जो साक्षात् परमात्मा का ही अंश है। जब हम शिवयोग की साधना को अपने नित्य जीवन में अपना लेते हैं तो हमें अपने वास्तविक स्वरूप का ज्ञान स्वतः ही होने लग जाता है। जैसे-जैसे हम प्रतिदिन नियमित रूप से शिवयोग की साधना करते हैं वैसे-वैसे हमारी आध्यात्मिक शक्तियां विकसित होती हैं और हमें उनका अनुभव होना भी प्रारंभ हो जाता है। अपने दैनिक जीवन में हमें उस सर्वशक्तिमान परमेश्वर की अनुभूति होने लगती है और हम अपने अंदर एक दिव्य ऊर्जा के प्रवाह को भी अनुभव करना शुरू कर देते हैं। शिवयोग साधना के मार्ग से हम पुनः एक बार अपनी दिव्यता को प्राप्त कर पाते हैं। #shivyogwisdom #divinity #oneness #equality #consciousness

क्यों जरूरी है स्वयं की शुद्धि?

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क्यों जरूरी है स्वयं की शुद्धि? मनुष्य जीवन कोई न कोई नया काम सफलता प्राप्त करने के उद्देश्य से ही करता है। लेकिन कभी-कभी उसे सफलता की जगह निराशा ही हाथ आती है। जिसे वह मायूस होकर ईश्वर को ही कोसना शुरू कर देता है। जबकि वह वास्तविकता से जान बूझकर अनजान बन जाता है। शिवयोग कहता है कि जब तक मनुष्य अपने शरीर और मन की शुद्धि नहीं करता, तब तक उसकी प्रार्थना ईश्वर तक नहीं पहुंचती। क्योंकि उसके मन व्याप्त विकार और उसके संचित कर्म उसके भाग्य को दुर्भाग्य में बदलते रहते हैं। इसलिए किसी भी काम को शुरू करने से पहले शुद्धि बेहद जरूरी होती है। जब हम साधना के माध्यम से अपने शरीर और मन की शुद्धि कर लेते है, तब हमारी हर प्रार्थना ईश्वर स्वीकार कर, हमारे लिए सफलता के मार्ग खोल देता है। #shivyogwisdom #innerpurification #consciousness #awareness #spirituality

भाषा से ज्यादा भाव शुद्धि क्यों जरूरी?

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  भाषा से ज्यादा भाव शुद्धि क्यों जरूरी? मनुष्य को सदैव जीवन में हर कर्म यानि बोलना, किसी से मिलना या फिर कोई भी कार्य करना हो, तो उसके पीछे जो भावना हो वह शुद्ध हो। क्योंकि एक आध्यात्मिक और भौतिक जीवन को सुखद और आनंद से वही व्यक्ति जीता है जिसके मन में सकारात्मक विचार होते हैं। इसी के साथ मन का निर्मल होना भी बहुत जरूरी होता है, क्योंकि ईश्वर भाषा को नहीं भावना को समझते हैं। यही कारण है जिस व्यक्ति की भावना दूषित होती है या दूसरों के प्रति घृणा का भाव रखता है, उसके जीवन में कभी सुख-शांति नहीं होती। वह भले ही अपने जीवन में भौतिक संसाधनों से संपन्न क्यों न हो लेकिन उसके मन को शांति और आनंद की अनुभूति नहीं होती है। वह सदैव परेशान ही देखने को मिलेगा, क्योंकि वह अपने सुख से नहीं दूसरों के सुख से दुःखी होता है। जबकि जिस व्यक्ति की भावना शुद्ध और निर्मल होती है वह बहुत थोड़े में ही प्रसन्न और आनंदित हो जाता है। क्योंकि उसका मन मैला नहीं होता है, वह दूसरों के सुख में भी अपनी खुशी ढूंढ लेता है। #shivyogwisdom #intensionmatter #awareness #consciousness #spirituality

कौन सा कर्म संचित कर्म बन जाता है?

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  कौन सा कर्म संचित कर्म बन जाता है? सभी धर्म-शास्त्रों में एक बात कही गई है कि कभी किसी का दिल नहीं दुखाना चाहिए। क्योंकि जब व्यक्ति के अंदर अहंकार आ जाता है तो वह कोई न कोई ऐसी बात कर बोल जाता है, जिसकी बात से अगले व्यक्ति का मन बहुत दुःखी हो जाता है। यह कर्म हमारा संचित कर्म बन जाता है, जिसका फल हमें इस जन्म के साथ ही साथ अगले जन्म में भी भोगना पड़ता है। इसलिए मन पर नियंत्रण करना चाहिए जो आप कर सकते हैं। क्योंकि संचित कर्मों को अच्छे कर्म करके, साधना करके और निष्काम कर्म करते हुए गुरु के सानिध्य में रहकर जला सकते हो। गुरु के द्वारा ही आपको यह ज्ञान प्राप्त हो सकता है कि सबके दिल के मंदिर में शिव रहता है। जब आप उस शिव को स्मरण कर दूसरे के आगे झुकते हो तो आपके मन में व्याप्त अहंकार, नकारात्मक विचार स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं और आप अपने जीवन में उस लक्ष्य की प्राप्ति कर लेते हो। जिसके लिए न जाने कितने जन्मों से इस सृष्टि में बार-बार जन्म ले रहे हो। #shivyogwisdom #karmicconnection #awareness #goalmindset #mindfulness

गुरु कृपा के लिए समर्पण क्यों जरूरी है?

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  गुरु कृपा के लिए समर्पण क्यों जरूरी है? गुरु का स्थान बहुत उच्च का होता है। इसलिए जब कोई शिष्य बनकर गुरु की शरण में समर्पित भाव से जाता है, तो गुरु की जिम्मेदारी बनती है कि वह उसके जीवन में अज्ञानता का अंधकार मिटाकर ज्ञान रूपी प्रकाश उसके जीवन में भर दे। क्योंकि शास्त्रों में यही गुरु का पहला और अंतिम कर्तव्य बताया गया है। क्योंकि जब शिष्य के जीवन का अंधकार मिट जाएगा और प्रकाश से जगमगा उठेगा, तब वह व्यक्ति अपने उस कर्तव्य को पूर्ण कर लेगा जिसके लिए उसने इस सृष्टि में जन्म लिया है। क्योंकि व्यक्ति के अंदर जब तक आध्यात्मिक ज्ञान की अनुभूति नहीं होगी, तब तक वह इस जीवन का आनंद नहीं ले पाएगा और न ही वह मोक्ष की प्राप्ति कर सकेगा। क्योंकि गुरु ही वह कड़ी होता है जो अपने शिष्य को मोक्ष का मार्ग दिखा सकता है। इसलिए हमारे धर्म-ग्रंथों में गुरु को भगवान से ऊपर बताया गया है। #shivyogwisdom #awareness #gurugrace #gratitude #mindfulness